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सहीह मुस्लिम

नंबर 1567

नंबर 1567किताब 5, नंबर 400अरबी नंबरिंग 684.02
وَحَدَّثَنَاهُ يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَسَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، جَمِيعًا عَنْ أَبِي عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَمْ يَذْكُرْ ‏ "‏ لاَ كَفَّارَةَ لَهَا إِلاَّ ذَلِكَ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Qatada, but here no mention has been made of" There is no explation for it except this

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।