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सहीह मुस्लिम

नंबर 1559

नंबर 1559किताब 5, नंबर 392अरबी नंबरिंग 679.03
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ وَأَخْبَرَنِيهِ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ حَرْمَلَةَ، عَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ عَلِيِّ بْنِ الأَسْقَعِ، عَنْ خُفَافِ بْنِ إِيمَاءٍ، ‏.‏ بِمِثْلِهِ إِلاَّ أَنَّهُ لَمْ يَقُلْ فَجُعِلَتْ لَعْنَةُ الْكَفَرَةِ مِنْ أَجْلِ ذَلِكَ ‏.‏
A hadith like this has been transmitted by Khufaf b. Ima' except this that he did not mention (these words):" cursing of unbelievers got a sanctions

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।