وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا الأَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَنَتَ شَهْرًا يَلْعَنُ رِعْلاً وَذَكْوَانَ وَعُصَيَّةَ عَصَوُا اللَّهَ وَرَسُولَهُ .
Anas b. Malik reported that the Messenger of Allah (ﷺ) observed Qunut for one month Invoking curse upon Ri'l, Dhakwan, 'Usayya. those who disobeyed Allah and His Messenger (ﷺ)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।