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सहीह मुस्लिम

नंबर 1544

नंबर 1544किताब 5, नंबर 377अरबी नंबरिंग 676
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ وَاللَّهِ لأُقَرِّبَنَّ بِكُمْ صَلاَةَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فَكَانَ أَبُو هُرَيْرَةَ يَقْنُتُ فِي الظُّهْرِ وَالْعِشَاءِ الآخِرَةِ وَصَلاَةِ الصُّبْحِ وَيَدْعُو لِلْمُؤْمِنِينَ وَيَلْعَنُ الْكُفَّارَ ‏.‏
Abu Salama b. 'Abd al-Rahman is reported to have said that he had heard Abu Huraira saying:I would say prayer along with you which is near to the prayer of the Messenger of Allah (ﷺ). and Abu Huraira recited Qunut in the noon and in the 'Isya' and in the morning prayer, and invoked blessing (of Allah) upon Muslims-and curse upon the unbelievers

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।