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सहीह मुस्लिम

नंबर 1538

नंबर 1538किताब 5, नंबर 371अरबी नंबरिंग 674.04
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَنَا وَصَاحِبٌ لِي فَلَمَّا أَرَدْنَا الإِقْفَالَ مِنْ عِنْدِهِ قَالَ لَنَا ‏ "‏ إِذَا حَضَرَتِ الصَّلاَةُ فَأَذِّنَا ثُمَّ أَقِيمَا وَلْيَؤُمَّكُمَا أَكْبَرُكُمَا ‏"‏ ‏.‏
Malik b Huwairith reported:I came to the Messenger of Allah (ﷺ) along with a companion of mine, and when we intended to return from him, he said: When there is time for prayer, announce prayer, pronounce Iqama, and the oldest amongst you should lead the prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।