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सहीह मुस्लिम

नंबर 1511

नंबर 1511किताब 5, नंबर 344अरबी नंबरिंग 649.11
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ الْمُرَادِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ ابْنِ هُرْمُزَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَحَدُكُمْ مَا قَعَدَ يَنْتَظِرُ الصَّلاَةَ فِي صَلاَةٍ مَا لَمْ يُحْدِثْ تَدْعُو لَهُ الْمَلاَئِكَةُ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ اللَّهُمَّ ارْحَمْهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Anyone amongst you who sat in a place of worship waiting for the prayer is in prayer and his ablution is not broken, the angels invoke blessing upon him (in these words): O Allah! pardon him. O Allah! have mercy upon him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।