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सहीह मुस्लिम

नंबर 1505

नंबर 1505किताब 5, नंबर 338अरबी नंबरिंग 661
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنِي سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، جَمِيعًا عَنِ الأَعْمَشِ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ، أَنَّهُ دَخَلَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَوَجَدَهُ يُصَلِّي عَلَى حَصِيرٍ يَسْجُدُ عَلَيْهِ ‏.‏
Abu Sa'id al-Khudri reported that he went to the Messenger of Allah (ﷺ) and found him observing prayer on a mat and prostrating on that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।