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सहीह मुस्लिम

नंबर 1474

नंबर 1474किताब 5, नंबर 307अरबी नंबरिंग 649.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدٌ، وَأَبُو سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ عَبْدِ الأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ إِلاَّ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ بِخَمْسٍ وَعِشْرِينَ جُزْءًا ‏"‏ ‏.‏
A hadith like this has been narrated by Abu Huraira with another chain of transmitters with a very slight change of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।