सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1459

नंबर 1459किताब 5, नंबर 292अरबी नंबरिंग 645.03
وَحَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، وَإِسْحَاقُ بْنُ مُوسَى الأَنْصَارِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَعْنٌ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَيُصَلِّي الصُّبْحَ فَيَنْصَرِفُ النِّسَاءُ مُتَلَفِّعَاتٍ بِمُرُوطِهِنَّ مَا يُعْرَفْنَ مِنَ الْغَلَسِ ‏.‏ وَقَالَ الأَنْصَارِيُّ فِي رِوَايَتِهِ مُتَلَفِّفَاتٍ ‏.‏
A'isha reported:The Messenger of Allah (ﷺ) used to observe the morning prayer, and the women would go back wrapped in their mantles being unrecognisable because of the darkness before dawn. (Ishaq b. Musa) al-Ansari (one of the transmitters in this chain of narration) narrated" wrapped" (only) in his narration. (No mention was made of mantles)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।