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सहीह मुस्लिम

नंबर 1457

नंबर 1457किताब 5, नंबर 290अरबी नंबरिंग 645.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، كُلُّهُمْ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ، - قَالَ عَمْرٌو حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، - عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ نِسَاءَ الْمُؤْمِنَاتِ، كُنَّ يُصَلِّينَ الصُّبْحَ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ يَرْجِعْنَ مُتَلَفِّعَاتٍ بِمُرُوطِهِنَّ لاَ يَعْرِفُهُنَّ أَحَدٌ ‏.‏
A'isha reported:The believing women used to pray the morning prayer with the Messenger of Allah and then return wrapped in their mantles. No one could recognise them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।