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सहीह मुस्लिम

नंबर 1454

नंबर 1454किताब 5, नंबर 287अरबी नंबरिंग 643.02
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الصَّلَوَاتِ نَحْوًا مِنْ صَلاَتِكُمْ وَكَانَ يُؤَخِّرُ الْعَتَمَةَ بَعْدَ صَلاَتِكُمْ شَيْئًا وَكَانَ يُخِفُّ الصَّلاَةَ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ أَبِي كَامِلٍ يُخَفِّفُ ‏.‏
Jabir b. Samura reported:The Messenger of Allah (ﷺ) used to observe prayers like your prayers, but he would delay the prayer after nightfall to a little after the time you observed it, and he would shorten the prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।