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सहीह मुस्लिम

नंबर 1450

नंबर 1450किताब 5, नंबर 283अरबी नंबरिंग 640.03
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الصَّبَّاحِ الْعَطَّارُ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ الْحَنَفِيُّ، حَدَّثَنَا قُرَّةُ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ ثُمَّ أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ ‏.‏
This hadith has been narrated by Qurra with the same chain of transmitters, but therein he did not mention:" He turned his face towards us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।