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सहीह मुस्लिम

नंबर 1439

नंबर 1439किताब 5, नंबर 272अरबी नंबरिंग 635.02
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا ابْنُ خِرَاشٍ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَاصِمٍ، قَالاَ جَمِيعًا حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَنَسَبَا أَبَا بَكْرٍ فَقَالاَ ابْنُ أَبِي مُوسَى ‏.‏
This hadith has been narrated by the same chain of transmitters by Hammam, and said about Abu Bakr that he was Ibn Abu Musa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।