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सहीह मुस्लिम

नंबर 1435

नंबर 1435किताब 5, नंबर 268अरबी नंबरिंग 633.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، وَأَبُو أُسَامَةَ وَوَكِيعٌ بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ أَمَا إِنَّكُمْ سَتُعْرَضُونَ عَلَى رَبِّكُمْ فَتَرَوْنَهُ كَمَا تَرَوْنَ هَذَا الْقَمَرَ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ثُمَّ قَرَأَ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ جَرِيرٌ ‏.‏
Waki' reported (this hadith) with the same chain of transmitters (that the Holy Prophet) said:You will be soon presented before your Lord, and you will see Him as you are seeing this moon, and then recited (the above-mentioned verse). But (in this hadith) no mention is made of Jarir

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।