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सहीह मुस्लिम

नंबर 1425

नंबर 1425किताब 5, नंबर 259अरबी नंबरिंग 627.06
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ مُسْلِمِ بْنِ صُبَيْحٍ، عَنْ شُتَيْرِ بْنِ شَكَلٍ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الأَحْزَابِ ‏ "‏ شَغَلُونَا عَنِ الصَّلاَةِ الْوُسْطَى صَلاَةِ الْعَصْرِ مَلأَ اللَّهُ بُيُوتَهُمْ وَقُبُورَهُمْ نَارًا ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ صَلاَّهَا بَيْنَ الْعِشَاءَيْنِ بَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ ‏.‏
Ali reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said on the day (of the Battle) of Ahzab: They diverted us from saying the middle prayer, i. e. the 'Asr prayer. May Allah fill their houses and graves with fire; he then observed this prayer between the evening prayer and the night prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।