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सहीह मुस्लिम

नंबर 1420

नंबर 1420किताब 5, नंबर 254अरबी नंबरिंग 627.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَبِيدَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ الأَحْزَابِ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَلأَ اللَّهُ قُبُورَهُمْ وَبُيُوتَهُمْ نَارًا كَمَا حَبَسُونَا وَشَغَلُونَا عَنِ الصَّلاَةِ الْوُسْطَى حَتَّى غَابَتِ الشَّمْسُ ‏"‏ ‏.‏
Ali reported:When it was the day (of the Battle) of Ahzab, the Messenger of Allah (ﷺ) said: May Allah fill their graves and houses with fire, as they detained us and diverted us from the middle prayer, till the sun set

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।