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सहीह मुस्लिम

नंबर 1407

नंबर 1407किताब 5, नंबर 241अरबी नंबरिंग 620
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنْ غَالِبٍ الْقَطَّانِ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي شِدَّةِ الْحَرِّ فَإِذَا لَمْ يَسْتَطِعْ أَحَدُنَا أَنْ يُمَكِّنَ جَبْهَتَهُ مِنَ الأَرْضِ بَسَطَ ثَوْبَهُ فَسَجَدَ عَلَيْهِ ‏.‏
Anas b. Malik reported:We used to say (the noonprayer) with the Messenger of Allah (ﷺ) in the intense heat, but when someone amongst us found it hard to place his forehead on the ground, he spread his cloth and prostrated on it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।