सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1404

नंबर 1404किताब 5, नंबर 238अरबी नंबरिंग 618
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، كِلاَهُمَا عَنْ يَحْيَى الْقَطَّانِ، وَابْنِ، مَهْدِيٍّ - قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، - عَنْ شُعْبَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا سِمَاكُ بْنُ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى وَحَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الظُّهْرَ إِذَا دَحَضَتِ الشَّمْسُ ‏.‏
Jabir b. Samura reported:The Apostle of Allah (ﷺ) used to offer the noon prayer when the sun declined

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।