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सहीह मुस्लिम

नंबर 1401

नंबर 1401किताब 5, नंबर 235अरबी नंबरिंग 617.01
وَحَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، - وَاللَّفْظُ لِحَرْمَلَةَ - أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اشْتَكَتِ النَّارُ إِلَى رَبِّهَا فَقَالَتْ يَا رَبِّ أَكَلَ بَعْضِي بَعْضًا ‏.‏ فَأَذِنَ لَهَا بِنَفَسَيْنِ نَفَسٍ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٍ فِي الصَّيْفِ فَهُوَ أَشَدُّ مَا تَجِدُونَ مِنَ الْحَرِّ وَأَشَدُّ مَا تَجِدُونَ مِنَ الزَّمْهَرِيرِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: The Fire made a complaint before the Lord saying." O Lord, some parts of mine have consumed the others." So it was allowed to take two exhalations, one exhalation in winter and the other exhalation in summer. That is why you find extreme heat (in summer) and extreme cold (in winter)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।