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सहीह मुस्लिम

नंबर 1399

नंबर 1399किताब 5, नंबर 233अरबी नंबरिंग 615.05
حَدَّثَنَا ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ، قَالَ هَذَا مَا حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ أَحَادِيثَ مِنْهَا وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَبْرِدُوا عَنِ الْحَرِّ فِي الصَّلاَةِ فَإِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ ‏"‏ ‏.‏
Hammam b. Munabbih reported:This is what Abu Huraira narrated to us from the Prophet and he transmitted some ahadith-one of them was that the Messenger of Allah (ﷺ) said: Let the heat become less severe before prayer, for the intensity of heat is from the exhalation of Hell

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।