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सहीह मुस्लिम

नंबर 1377

नंबर 1377किताब 5, नंबर 211अरबी नंबरिंग 608.03
وَحَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَدْرَكَ مِنَ الْعَصْرِ رَكْعَةً قَبْلَ أَنْ تَغْرُبَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ وَمَنْ أَدْرَكَ مِنَ الْفَجْرِ رَكْعَةً قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: He who finds (gets) a rak'ah of the afternoon (prayer) before the setting of the sun, he in fact gets (the full prayer), and he who gets a rak'ah of the morning (prayer) before the rising of the sun he in fact gets (the full prayer)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।