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सहीह मुस्लिम

नंबर 1341

नंबर 1341किताब 5, नंबर 178अरबी नंबरिंग 593.04
وَحَدَّثَنَا حَامِدُ بْنُ عُمَرَ الْبَكْرَاوِيُّ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْمُفَضَّلِ ح قَالَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنِي أَزْهَرُ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ وَرَّادٍ، كَاتِبِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَ كَتَبَ مُعَاوِيَةُ إِلَى الْمُغِيرَةِ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ مَنْصُورٍ وَالأَعْمَشِ ‏.‏
Warrad, the scribe of Mughira b. Shu'ba, reported:Mu'awiya wrote to Mughira (the contents) of the hadith as transmitted by Mansur and A'mash

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।