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सहीह मुस्लिम

नंबर 1328

नंबर 1328किताब 5, नंबर 166अरबी नंबरिंग 588.04
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ اللَّهِ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported the Messenger of Allah (ﷺ) as saying:Seek refuge with Allah from the torment of Hell, seek refuge with Allah from the torment of the grave, and seek refuge with Allah from the trial of Masih al-Dajjal and seek refuge with Allah from the trial of life and death

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।