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सहीह मुस्लिम

नंबर 1322

नंबर 1322किताब 5, नंबर 160अरबी नंबरिंग 586.02
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَشْعَثَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، بِهَذَا الْحَدِيثِ وَفِيهِ قَالَتْ وَمَا صَلَّى صَلاَةً بَعْدَ ذَلِكَ إِلاَّ سَمِعْتُهُ يَتَعَوَّذُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ ‏.‏
Masruq reported this hadith on the authority of 'A'isha who said:Never did he (the Holy Prophet) say prayer after this in which I did not hear him seeking refuge from the torment of the grave

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।