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सहीह मुस्लिम

नंबर 1320

नंबर 1320किताब 5, नंबर 158अरबी नंबरिंग 585
وَحَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، وَعَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ، قَالَ حَرْمَلَةُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَعْدَ ذَلِكَ يَسْتَعِيذُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ ‏.‏
Abu Huraira reported. I heard the Messenger of Allah (ﷺ) seeking refuge from the torment of the grave after this (after the revelation)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।