सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1313

नंबर 1313किताब 5, नंबर 151अरबी नंबरिंग 581.01
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، وَمَنْصُورٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، أَنَّ أَمِيرًا، كَانَ بِمَكَّةَ يُسَلِّمُ تَسْلِيمَتَيْنِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ أَنَّى عَلِقَهَا قَالَ الْحَكَمُ فِي حَدِيثِهِ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَفْعَلُهُ ‏.‏
Abu Ma'mar reported:There was an Amir in Mecca who pronounced taslim twice. Abdullah said: Where did he get this sunnah? Al-Hakam said: There is a hadith to the effect that the Messenger of Allah (ﷺ) did like It

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।