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सहीह मुस्लिम

नंबर 1307

नंबर 1307किताब 5, नंबर 145अरबी नंबरिंग 579.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرِ بْنِ رِبْعِيٍّ الْقَيْسِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو هِشَامٍ الْمَخْزُومِيُّ، عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ، - وَهُوَ ابْنُ زِيَادٍ - حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ حَكِيمٍ، حَدَّثَنِي عَامِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَعَدَ فِي الصَّلاَةِ جَعَلَ قَدَمَهُ الْيُسْرَى بَيْنَ فَخِذِهِ وَسَاقِهِ وَفَرَشَ قَدَمَهُ الْيُمْنَى وَوَضَعَ يَدَهُ الْيُسْرَى عَلَى رُكْبَتِهِ الْيُسْرَى وَوَضَعَ يَدَهُ الْيُمْنَى عَلَى فَخِذِهِ الْيُمْنَى وَأَشَارَ بِإِصْبَعِهِ ‏.‏
Abdullah b. Zubair narrated on the authority of his father:When the Messenger of Allah (ﷺ) sat in prayer. he placed the left foot between his thigh and shank and stretched the right foot and placed his left hand on his left knee and placed his right hand on his right thigh, and raised his finger

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।