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सहीह मुस्लिम

नंबर 1299

नंबर 1299किताब 5, नंबर 137अरबी नंबरिंग 578.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، مَوْلَى الأَسْوَدِ بْنِ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، قَرَأَ لَهُمْ ‏{‏ إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ‏}‏ فَسَجَدَ فِيهَا فَلَمَّا انْصَرَفَ أَخْبَرَهُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَجَدَ فِيهَا ‏.‏
Abu Salama b. 'Abual-Rahman reported:Abu Huraira recited before them:" hen the heaven burst asunder" (al-Qur'an, lxxxiv. 1) and performed prostration. After completing (the prayer) he informed them that the Messenger of Allah (ﷺ) has prostrated himself at it (this verse)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।