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सहीह मुस्लिम

नंबर 1281

नंबर 1281किताब 5, नंबर 119अरबी नंबरिंग 572.08
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الظُّهْرَ خَمْسًا فَلَمَّا سَلَّمَ قِيلَ لَهُ أَزِيدَ فِي الصَّلاَةِ قَالَ ‏ "‏ وَمَا ذَاكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا صَلَّيْتَ خَمْسًا ‏.‏ فَسَجَدَ سَجْدَتَيْنِ ‏.‏
Abdullah (b. Mas'ud) reported:The Apostle of Allah (ﷺ) said five rak'ahs of the noon prayer and when he completed the prayer, It was said to him: Has there been (commanded) an addition In prayer? He said: What is it? They said: You have said five rak'ahs, so he performed two prostrations

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।