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सहीह मुस्लिम

नंबर 1262

नंबर 1262किताब 5, नंबर 100अरबी नंबरिंग 569.01
وَحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا الثَّوْرِيُّ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَجُلاً، نَشَدَ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ مَنْ دَعَا إِلَى الْجَمَلِ الأَحْمَرِ ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ وَجَدْتَ ‏.‏ إِنَّمَا بُنِيَتِ الْمَسَاجِدُ لِمَا بُنِيَتْ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
Sulaiman b. Buraida narrated it on the authority of his father that a man cried out in the mosque saying:Who had called out for the red camel? Upon this the Messenger of Allah (ﷺ) said: May it not be restored to you! The mosques are built for what they are meant

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।