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सहीह मुस्लिम

नंबर 1255

नंबर 1255किताब 5, नंबर 93अरबी नंबरिंग 564.04
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، ح قَالَ وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالاَ جَمِيعًا أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏ "‏ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ - يُرِيدُ الثُّومَ - فَلاَ يَغْشَنَا فِي مَسْجِدِنَا ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرِ الْبَصَلَ وَالْكُرَّاثَ ‏.‏
Ibn Juraij has narrated it with the same chain of transmitters:He who eats of this plant, i. e. garlic, should not come to us in our mosque, and he made no mention of onions or leek

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।