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सहीह मुस्लिम

नंबर 1250

नंबर 1250किताब 5, नंबर 88अरबी नंबरिंग 562
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ، - وَهُوَ ابْنُ صُهَيْبٍ - قَالَ سُئِلَ أَنَسٌ عَنِ الثُّومِ، فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ فَلاَ يَقْرَبَنَّا وَلاَ يُصَلِّي مَعَنَا ‏"‏ ‏.‏
Ibn Suhaib reported:Anas was asked about the garlic; he stated that the Messenger of Allah (ﷺ) had said: He who eats of this plant (garlic) should not approach us and pray along with us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।