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सहीह मुस्लिम

नंबर 1229

नंबर 1229किताब 5, नंबर 67अरबी नंबरिंग 550.02
وَحَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، كُلُّهُمْ عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مِهْرَانَ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ وَزَادَ فِي حَدِيثِ هُشَيْمٍ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرُدُّ ثَوْبَهُ بَعْضَهُ عَلَى بَعْضٍ ‏.‏
Abu Huraira reported:I perceive as if I am looking at the Messenger of Allah (ﷺ) folding up a part of his cloth with another one

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।