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सहीह मुस्लिम

नंबर 1219

नंबर 1219किताब 5, नंबर 59अरबी नंबरिंग 546.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ الدَّسْتَوَائِيُّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ مُعَيْقِيبٍ، قَالَ ذَكَرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم الْمَسْحَ فِي الْمَسْجِدِ - يَعْنِي الْحَصَى - قَالَ ‏ "‏ إِنْ كُنْتَ لاَ بُدَّ فَاعِلاً فَوَاحِدَةً ‏"‏ ‏.‏
Mu'aiqib quoted the Messenger of Allah (ﷺ) mentioning the removal of pebbles from the ground where he prostrated himself. He (the Prophet) said:It you must do so, do it only once

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।