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सहीह मुस्लिम

नंबर 1217

नंबर 1217किताब 5, नंबर 57अरबी नंबरिंग 544.02
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدٍ الْقَارِيُّ الْقُرَشِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو حَازِمٍ، أَنَّ رِجَالاً، أَتَوْا سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ ح قَالَ وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، قَالَ أَتَوْا سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ فَسَأَلُوهُ مِنْ أَىِّ شَىْءٍ مِنْبَرُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَسَاقُوا الْحَدِيثَ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ أَبِي حَازِمٍ ‏.‏
Abu Hazim reported:They (the people) came to Sahl b. Sa'd and they asked him of what thing the pulpit of the Messenger of Allah (ﷺ) was made, and the rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।