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सहीह मुस्लिम

नंबर 1215

नंबर 1215किताब 5, नंबर 55अरबी नंबरिंग 543.04
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ، جَمِيعًا عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ سُلَيْمٍ الزُّرَقِيِّ، سَمِعَ أَبَا قَتَادَةَ، يَقُولُ بَيْنَا نَحْنُ فِي الْمَسْجِدِ جُلُوسٌ خَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ غَيْرَ أَنَّهُ لَمْ يَذْكُرْ أَنَّهُ أَمَّ النَّاسَ فِي تِلْكَ الصَّلاَةِ ‏.‏
Abu Qatada reported:As we were sitting in the mosque, the Messenger of Allah (ﷺ) came to us, and the rest of the hadith is the same except that he made no mention that he led people in this prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।