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सहीह मुस्लिम

नंबर 1213

नंबर 1213किताब 5, नंबर 53अरबी नंबरिंग 543.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي سُلَيْمَانَ، وَابْنِ، عَجْلاَنَ سَمِعَا عَامِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، يُحَدِّثُ عَنْ عَمْرِو بْنِ سُلَيْمٍ الزُّرَقِيِّ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ الأَنْصَارِيِّ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَؤُمُّ النَّاسَ وَأُمَامَةُ بِنْتُ أَبِي الْعَاصِ وَهْىَ ابْنَةُ زَيْنَبَ بِنْتِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم عَلَى عَاتِقِهِ فَإِذَا رَكَعَ وَضَعَهَا وَإِذَا رَفَعَ مِنَ السُّجُودِ أَعَادَهَا ‏.‏
अबू क़तादा अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि आप लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे और उमामा बिंत अबुल आस, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुपुत्री ज़ैनब की बेटी थीं, आपके कंधे पर थीं। जब आप रुकू करते, तो उनको उतार देते और जब सजदे से उठते, तो उनको दोबारा कंधे पर उठा लेते।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।