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सहीह मुस्लिम

नंबर 1192

नंबर 1192किताब 5, नंबर 32अरबी नंबरिंग 534.02
وَحَدَّثَنَا مِنْجَابُ بْنُ الْحَارِثِ التَّمِيمِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ مُسْهِرٍ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، ح قَالَ وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا مُفَضَّلٌ، كُلُّهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، وَالأَسْوَدِ، أَنَّهُمَا دَخَلاَ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِ أَبِي مُعَاوِيَةَ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ ابْنِ مُسْهِرٍ وَجَرِيرٍ فَلَكَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى اخْتِلاَفِ أَصَابِعِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ رَاكِعٌ ‏.‏
This hadith is narrated on the authority of Alqama and Aswad by another chain of transmitters and in the hadith transmitted by Ibn Mus-hir and Jabir the words are:" I perceive as if I am seeing the gap between the fingers of the Messenger of Allah (ﷺ) as he was bowing

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।