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सहीह मुस्लिम

नंबर 1177

नंबर 1177किताब 5, नंबर 17अरबी नंबरिंग 525.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ جَمِيعًا عَنْ يَحْيَى، - قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، - عَنْ سُفْيَانَ، حَدَّثَنِي أَبُو إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ، يَقُولُ صَلَّيْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ عَشَرَ شَهْرًا أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا ثُمَّ صُرِفْنَا نَحْوَ الْكَعْبَةِ ‏.‏
Abu Ishaq reported:I heard al-Bara' saying: We prayed with the Messenger of Allah (ﷺ) (with our faces) towards Bait-ul-Maqdis for sixteen months or seventeen months. Then we were made to change (our direction) towards the Ka'ba

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Mosques and Places of Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।