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सहीह मुस्लिम

नंबर 6942

नंबर 6942किताब 49, नंबर 6अरबी नंबरिंग 2738.01
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، قَالَ كَانَ لِمُطَرِّفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ امْرَأَتَانِ فَجَاءَ مِنْ عِنْدِ إِحْدَاهُمَا فَقَالَتِ الأُخْرَى جِئْتَ مِنْ عِنْدِ فُلاَنَةَ فَقَالَ جِئْتُ مِنْ عِنْدِ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ فَحَدَّثَنَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَقَلَّ سَاكِنِي الْجَنَّةِ النِّسَاءُ ‏"‏ ‏.‏
Imran b. Husain reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:Amongst the inmates of Paradise the women would form a minority

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · The Book of Heart-Melting Traditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।