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सहीह मुस्लिम

नंबर 6877

नंबर 6877किताब 48, नंबर 71अरबी नंबरिंग 2707
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنِي سُمَىٌّ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ سُوءِ الْقَضَاءِ وَمِنْ دَرَكِ الشَّقَاءِ وَمِنْ شَمَاتَةِ الأَعْدَاءِ وَمِنْ جَهْدِ الْبَلاَءِ ‏.‏ قَالَ عَمْرٌو فِي حَدِيثِهِ قَالَ سُفْيَانُ أَشُكُّ أَنِّي زِدْتُ وَاحِدَةً مِنْهَا ‏.‏
It was narrated from Abu Huraira that:Allah's Apostle (ﷺ) used to seek refuge (in Allah) from the evil of what has been decreed, from misery, from the mockery of (triumphant) enemies, and from severe calamity. `Amr (one of the narrators) said in his narration: "Sufyan said: 'I fear I may have added one of them (the phrases)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।