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सहीह मुस्लिम

नंबर 6874

नंबर 6874किताब 48, नंबर 68अरबी नंबरिंग 2706.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، كِلاَهُمَا عَنِ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّ يَزِيدَ لَيْسَ فِي حَدِيثِهِ قَوْلُهُ ‏ "‏ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported from Allah's Messenger (ﷺ) (this suppli- cation) but with this variation that these words are not found in that supplication:" From the trial of life and death

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।