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सहीह मुस्लिम

नंबर 6873

नंबर 6873किताब 48, नंबर 67अरबी नंबरिंग 2706.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، قَالَ وَأَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، حَدَّثَنَا أَنَسُ، بْنُ مَالِكٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْجُبْنِ وَالْهَرَمِ وَالْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (ﷺ) used to say:" O Allah, I seek refuge in Thee from incapacity, from indolence, from cowardice, from senility, from miserliness, and I seek refuge in Thee from the torment of the grave and from trial of the life and death

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book Pertaining to the Remembrance of Allah, Supplication, Repentance and Seeking Forgiveness

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।