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सहीह मुस्लिम

नंबर 6803

नंबर 6803किताब 47, नंबर 29अरबी नंबरिंग 1017.08
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، وَأَبُو كَامِلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ الأُمَوِيُّ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنِ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي قَالُوا، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَوْنِ، بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ عَنِ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏
Jarir transmitted this hadith from his father through several other chains of narrators

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book of Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।