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सहीह मुस्लिम

नंबर 6789

नंबर 6789किताब 47, नंबर 15अरबी नंबरिंग 2672.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ النَّضْرِ بْنِ أَبِي النَّضْرِ، حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ الأَشْجَعِيُّ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، وَأَبِي، مُوسَى الأَشْعَرِيِّ قَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنِي الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ شَقِيقٍ، قَالَ كُنْتُ جَالِسًا مَعَ عَبْدِ اللَّهِ وَأَبِي مُوسَى وَهُمَا يَتَحَدَّثَانِ فَقَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِ حَدِيثِ وَكِيعٍ وَابْنِ نُمَيْرٍ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of 'Abdullah (b. Mas'ud) and Abu Musa (al-Asha'ri) through other chains of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book of Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।