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सहीह मुस्लिम

नंबर 6788

नंबर 6788किताब 47, नंबर 14अरबी नंबरिंग 2672.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، وَأَبِي، قَالاَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، قَالَ كُنْتُ جَالِسًا مَعَ عَبْدِ اللَّهِ وَأَبِي مُوسَى فَقَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ بَيْنَ يَدَىِ السَّاعَةِ أَيَّامًا يُرْفَعُ فِيهَا الْعِلْمُ وَيَنْزِلُ فِيهَا الْجَهْلُ وَيَكْثُرُ فِيهَا الْهَرْجُ وَالْهَرْجُ الْقَتْلُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Wa'il reported:I was sitting with 'Abdullah and Abu Musa that they reported Allah's Messenger (ﷺ) having said: Prior to the Last Hour, there would be a time when knowledge would be taken away, and ignorance would take its place and there would be bloodshed on a large scale

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book of Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।