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सहीह मुस्लिम

नंबर 6680

नंबर 6680किताब 45, नंबर 177अरबी नंबरिंग 2620
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُوسُفَ الأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي مُسْلِمٍ الأَغَرِّ، أَنَّهُ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، وَأَبِي، هُرَيْرَةَ قَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْعِزُّ إِزَارُهُ وَالْكِبْرِيَاءُ رِدَاؤُهُ فَمَنْ يُنَازِعُنِي عَذَّبْتُهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id Khudri and Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Allah, the Exalted and Glorious, said: Glory is His lower garment and Majesty is His cloak and (Allah says, ) He who contends with Me in regard to them I shall torment him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।