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सहीह मुस्लिम

नंबर 6679

नंबर 6679किताब 45, नंबर 176अरबी नंबरिंग 2619
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ، قَالَ هَذَا مَا حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ أَحَادِيثَ مِنْهَا وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ دَخَلَتِ امْرَأَةٌ النَّارَ مِنْ جَرَّاءِ هِرَّةٍ لَهَا - أَوْ هِرٍّ - رَبَطَتْهَا فَلاَ هِيَ أَطْعَمَتْهَا وَلاَ هِيَ أَرْسَلَتْهَا تُرَمِّمُ مِنْ خَشَاشِ الأَرْضِ حَتَّى مَاتَتْ هَزْلاً ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported from Allah's Messenger (ﷺ) A hadith out of which one was this that Allah's Messenger (ﷺ) said:A woman got into Hell-Fire because of a cat whom she had tied, and thus it could not eat, and she did not let it free so that it could devour the vermin of the earth, until it died

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।