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सहीह मुस्लिम

नंबर 6520

नंबर 6520किताब 45, नंबर 20अरबी नंबरिंग 2556.01
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ، بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَاطِعٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَ سُفْيَانُ يَعْنِي قَاطِعَ رَحِمٍ ‏.‏
Jubair b. Mut'im reported on the authority of his father that Allah's Messenger (ﷺ) said:The severer would not enter Paradise. Ibn Umar said that Sufyan (explained it as): One who severs the tie of kinship would not enter Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।