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सहीह मुस्लिम

नंबर 6386

नंबर 6386किताब 44, नंबर 216अरबी नंबरिंग 2485.03
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّهُ سَمِعَ حَسَّانَ بْنَ ثَابِتٍ الأَنْصَارِيَّ، يَسْتَشْهِدُ أَبَا هُرَيْرَةَ أَنْشُدُكَ اللَّهَ هَلْ سَمِعْتَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ يَا حَسَّانُ أَجِبْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم اللَّهُمَّ أَيِّدْهُ بِرُوحِ الْقُدُسِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ نَعَمْ ‏.‏
Abd al-Rahman reported that he heard Hassin b. Thabit al-Ansari call Abu Huraira to bear witness by saying:I adjure you by Allah if you had not heard Allah's Apostle (ﷺ) saying: Hassin, give a reply on behalf of the Messenger of Allah. O Allah, help him with Ruh-ul-Qudus. Abu Huraira said: Yes, it is so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।